एक कविता लिखना चाहता हूँहो रही है शाम ।डूबने वाले हैं अंधेरे में पेड़ ।इमारतों के ओर-छोर ।घर जाना चाहती हैं चिड़ियाँ ।एक सन्नाटा है यहाँ ।खाली पड़ी हैं बगीचे की कुर्सियाँ ।आ रही हैं घरों सेआवाज़ें मिली-जुली ।आकाश फ़िर लौट आया है अपने में ।एक कविता लिखना चाहता हूँ ।
प्रयाग शुक्ल की रचनाओं से साभार.
चांद चढ़ रहा हैआकाश में--इस शहर में ।रिक्शों की घंटियाँ,भोंपू गाड़ियों के,तितर-बितर आवाज़ें ।
..........................चढ़ रहा है चांद,एक दूसरे शहर में ।